श्री गणेश जी - श्री लक्ष्मीनाथ जी के आशीर्वाद से - फतेहपुर शेखावाटी राजस्थान 1961
1961 से शुद्ध देसी घी में हाथ से बने पेड़े। दादाजी की रेसिपी, वही लोहे की कढ़ाई, वही धीमी आंच — हर निवाले में फतेहपुर शेखावाटी की मिठास।
शुरू से आज तक
60+ साल
का भरोसा
हमारे प्रसिद्ध उत्पाद
1961 में हमारे दादाजी श्री बनवारी लाल क्याल जी ने फतेहपुर शेखावाटी राजस्थान की एक छोटी सी दुकान से शुरुआत की। उनका एक ही उसूल था — "मिठाई में मिलावट नहीं, मेहनत होनी चाहिए।"
आज तीसरी पीढ़ी उसी लोहे की कढ़ाई में, धीमी आंच पर दूध औटाकर हाथ से पेड़ा बनाती है। केसर , काजू से, और घी पास के गाँवों से — हर सामग्री हम खुद चुनते हैं।
100%
शुद्ध घी
हाथ से
बना हुआ
3
पीढ़ियाँ